Sunday, 2 December 2018

महर्षि मेंहीं ज्ञान वाटिका देहरादून


मंगल मूरति सदगुरु, मिलवै सर्वाधार ।
मंगलमय मंगल करण, विनवै बारम्बार।
महर्षि मेंही नगर पोस्ट: द्वारा, वाया रायपुर 
जनपद- देहरादून उत्तराखंड 9675772502 
शंकर बाबा (आश्रम साधु)


महर्षि मेंहीं ज्ञान वाटिका 




महर्षि मेंही ज्ञान वाटिका देहरादून 



आश्रम के बाहर की परिदृश्य 



भोजन व्यवस्था तथा साधु समाज 

सदगुरु की आरती " व्यास" रचित

                   💐 सदगुरु की आरती 💐
आरती सदगुरु वर महान की 
      धीर धर्म सत शिष्य प्राण की।
काम मोह मद मोह निवारण 
      जन अंतर सद्ज्ञान विकाशन।
आतमबोध प्रकाश करावन
      तुरीयापद अतिकल्प ध्यान की।। आरती
स्रुति पुराण शुचि मर्म बतावन 
      कर्म अकर्म विकर्म प्रकाशन।।
जन्मार्जित अघपुंज हराशन।
      सुकृत सिंधु विज्ञान खान की।। आरती 
त्रिविध ताप अभिशाप मिटावन 
      भव भ्रमन्त जन पंथ गहावन।
शोक द्रोह दृढ़ कोट ढहावन 
     निर्मलतम अतिशय अमान की।। आरती 
पद पाथोज विमल मति कारिणी 
        चंचलता कटुता मन हारिणी ।।
मेंहीवर मुख कमल सुहावनि 
        व्यास" विश्व जननी सुत्राण की।। आरती 
           💐💐💐💐💐💐💐

आरती श्री सदगुरू महाराज की

सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज द्वारा रचित आरती।                    💐
आरती तन -मंदिर में कीजै।
        दृष्टि युगल कर सन्मुख दीजै।
चमके विंदु सूक्ष्म अति उज्ज्वल।
        ब्रह्मज्योति अनुपम लख लीजै।
जगमग जगमग रूप ब्राह्माण्डा ।
     निरखि निरखि जोति तज दीजै।
शब्द सूरत अभ्यास सरलतर ।
        करि करि सार शबद गहि लीजै।
ऐसी जुगति काया गढ़ त्यागी।
        भव भ्रम भेद सकल मल छीजै।
भव खंडन आरति यह निर्मल।
        करि मेंहीं अमृत रस पीजै।
                💐 
         

बंगलोर 13 वां महाअधिवेशन 2017

👌 सतगुरु की सेवा करै, पावै परवाना हो।
कहै कबीर धर्मदास से , तेहि काल डराना हो।
                      : कबीर साहेब

👌 यह संसार देख मत भुलै सबहि सेबल फूल ।
तन नहीं तेरा,धन नहीं तेरा कहा रहो इहिं लागि।
                      : संत दादू दयाल

👌 घरी घरी घड़ियाल पुकारे, का सोवै उठि जाग रे।
चोआ चंदन चुपड़ तेलना ,अरु अलबेली पाग रे।
                       : संत धरनिदास जी

👌 तुम्ही सुंदर तुम्हीं सियाने, तुम्ही सुघर सुजाना।
सगल जोग अरु गिआन धियान इक निमख न कीमती जाना।
                           : गुरु अर्जुन देव


बंगलुरु 13 वां महाअधिवेशन 



व्यासानंद जी महाराज सत्संग 2018


शरण आये सो सबही उबरे ऐसी उन की रीत 
सुंदर देह देखि मत भूलो जैसे तृन पर सीत ।

अररिया सत्संग 2018


काम हेतु तुम निसि दिन नाचे का तुम भरम भुलाया 
नाम हेतु तुम कबहुँ न नाचे जो सिरजल तोरी काया।
 
सुपौल त्रिवेणीगंज सत्संग 2018 



बाबा व्यासानंद जी महाराज प्रवचन नवम्बर 2018


शुभ और अशुभ करम पुरबले , रति घटै न बढ़े ।
होनहार हौवे पुनि सोई , चिंता काहे करै।

बिहपुर प्रवचन 13 नवम्बर 2018 


माता पिता सुत सम्पति दारा मोह के ज्वाल जरै 
मन तू हंसन से साहिब तजि भटकत काहे फिरै 

भागलपुर प्रवचन 23 nov 2018 


साधुन सेवा कर मन मेरे कोटिन व्याधि हरै
कहत कबीर सुनो भाई साधों सहज में जीव तरै


भागलपुर प्रवचन 22 nov 2018 



आश्रम जाने की सूचना तथा नियमावली ।

जी मैं आकाश चंद्र मिश्रा " बिट्टू " बाबा आश्रम का एक छोटा सा सेवक हु बाबा की कृपा से मुझे आश्रम में साफ सफाई करने का भाग मिल जाता हैं कभी कभी जब मैं जाता हूं ।
मैंने जितने भी आश्रम देखे हैं, उनकी व्यवस्था अति उत्तम हैं, तथा वहां के वातावरण में शांति तथा भक्ति की विशेष परिदृश्य का संस्कार की एक धारा बहती हैं , सभी साधु महात्माओं का साथ एक विशेष प्रकार की महक लाती हैं जीवन में।
यूँ तो कई आश्रम हैं, मगर स्वामी व्यासानंद महराज जी की मुख्यतः 3 आश्रम में अधिकतर ठहराव होता हैं :
जिनमें
महर्षि मेंहीं ब्रम्ह विद्यापीठ , महर्षि मेंही ज्ञान वाटिका, महर्षि मेंही मठ आते हैं ।
हरिद्वार स्थित महर्षि मेंहीं ब्रह्म विद्यापीठ जाने के लिए आपको हरिद्वार जाने होंगे, हरिद्वार स्टेशन से जब आप बाहर आते हैं तो आपको भगवान शिव की विशाल प्रतिमा देखने को मिलेगी यह दृश्य विश्व विख्यात हैं तथा लोगों में भक्तिमय माहौल मिलेगा, आप वहाँ से ऑटो रिक्शा रिजर्व कर सेकते हैं या हर की पौड़ी आ सकते हैं फिर वहां से आनंदवन सप्तसरोवर गीता कुटीर गली no 3 हरिद्वार आके महर्षि मेंही ब्रह्मविद्यापीठ में
सुबोध बाबा या महर्षि बाबा से मिल कर पूरी जानकारी ले सकते  हैं ।
वहीं बगल में गोशाला भी हैं ।
महर्षि मेंहीं ज्ञान वाटिका में जाने के लिए आपको देहरादून जाना होगा देहरदून स्टेशन से आप रायपुर के लिए ऑटो ले
रायपुर से दून वैली मालदेवता चले जाय वहां से BSF रेंग होते हुए पहाड़ के बीच स्थित इस भव्य आश्रम की भव्यता महान हैं। यहां आपको शंकर बाबा मिल जाएंगे , सुभम जो आश्रम में सेवक हैं वो मिल जाएंगे, वहां के प्रधान जी भी आपको मिल जाएंगे जो आश्रम की निगरानी करते हैं।
महर्षि मेंहीं मठ जाने के लिए आपको सबसे पहले बंगलुरु यशवंतपुर जाना होगा, वहां से आप 258 no की गाड़ी पकर कर मदनायकन हल्ली चले जाएं फिर लक्ष्मीपुरारोड में 2 km चलने से JD अग्रवाल फार्म मिलेंगे वहां से दाहिने आपको 300 जाना होगा वही भव्य आश्रम आपको नज़र आ जाएंगे वहां बलवीर बाबा, संतोष, यादव जी , आपको मिल जाएंगे ।
बंगलोर आश्रम बहुत ही भव्य आश्रम हैं।

नियमावली :
यहां के नियम बहुत ही संस्कारी हैं, सुबह 4 बजे से ध्यान होता हैं फिर स्तुति आरती होती हैं फिर भोजन की तैयारी स्नान आदि की व्यवस्था होती हैं , भोजन प्रांत सभी फिर प्रवचन सुनते फिर विश्राम होता हैं फिर 3 बजे ध्यान होता है  उसके बाद संध्या भोजन की तैयारी होती हैं फिर भोजन उपरांत ध्यान भजन स्तुति आरती से दिन का समापन होता हैं ।
वैसे हर आश्रम में जब बाबा व्यासानंद जी महाराज पधारते हैं तो भक्तों की भीड़ के कारण कुछ फेर बदल होता हैं मगर मुख्यतः यही नियम होता हैं , मैं आकाश दो बार आश्रम के नियम का पालन करने में विफल रहा हूँ, गुरु महाराज से निवेदन , मुझे आशीर्वाद प्रदान करे कि कभी भी अगर आश्रम गया तो आश्रम के नियम का पालन कर पाउ।
जय गुरुदेव ।




स्वामी व्यसानन्द जी महाराज

💐💐💐💐💐💐💐💐💐

☺ पहले जन्म पूत का भयउ बाप जनमिया पाछे”💐
धर्म का मूल गुरु की मूर्ति हैं, कर्म का मूल गुरु के चरण हैं, सत्य का मूल गुरु के वचन हैं, और शांति के मूल गुरु की कृपा हैं"💐👍
स्वामी व्यासानद जी महाराज"
वेद और विद्वान कहते हैं कि परमात्मा के नाम, गुण और कर्म अनंत हैं, पुनः वे ही कहते हैं कि परमात्मा अनाम अगुण और कर्म रहित है ,
एक जातिगत जन्मजात नाम होता हैं जैसे: गाय, भैंस, किट, पतंग, कौआ, मैना, पीपल, बरगद, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यक्ष, गंधर्व, आदि।
दूसरा स्वभावगत संस्कारी नाम होता हैं।
जो किसी व्यक्ति विशेष के द्वारा रखा जाता हैं।
जैसे : राम श्याम, गायत्री, सावित्री आदि।
एक नाम सार्थक होता हैं, तो दूसरा निरर्थक होता हैं, सार्थक नाम वह कहलाता हैं कि जिसका कोई अर्थ हो,
भाव हो, उद्देश्य हो, महत्ता हो, गुण सहित हो



“पलटू प्रथमें संत जन दूजे हैं करतार”💐

ज्ञान सम्पूरण अंग सम 💐

👍 श्रेष्ट कुल में जन्म लेने के कारण उनकी (व्यसानन्दजी महाराज) रुचि सहस्त्रनाम जैसे गायत्री, यमुना, शिव, गोपाल, विष्णु सहस्रनाम पढ़ने की आदत थी
जब उन्होंने संतमत में दीक्षित होकर अपने गुरुदेव की समाधि सिद्ध अवस्था देखी तो बलात मन में एक ललक पैदा हुई कि जिन संत सदगुरु की महिमा गाते राम कृषणादि महान देव भी नहीं अघाते, उनका नाम क्यों नहीं प्रकिशीत हो।😊👌

हे गुरु आप महान ज्ञानवान, आत्मज्ञ, महान खोजी सर्वत्र परिव्याप्त, परमात्मा को अपने ही अंदर ढूंढने वाले, महत्तम पदार्थ की तलाश करने वाले, महान ज्ञानी, महान परमात्मा को जानने वाले, श्रेष्ठ ज्ञान अनुभव ज्ञान के रूप, विशाल हृदय वाले, महान धैर्यवान, समग्र विश्व की समस्त विपतियों को सहजता पूर्वक झेल लेनेवाले।
समग्र इन्द्रिय एवम उनसे उद्भूत समस्त विकारों को पराजित कर देने वाले।बहुत बड़ा किनारा जहां के भक्त को भवसागर से पार उतारने वाली भक्ति रूपी नाव मिल जाती हैं।
अत्यंत विशाल वृक्ष जिसके नीचे शीतल छाया मिलती हैं,
बहुत बड़े सहायक, जन्म मरण रूप महान विपत्तियों से निस्तार करने वाले सच्चे सहयोगी, बहुत बड़ा अनुष्ठान करनेवाले निरंतर सत्संग रूपी यज्ञ के अनुष्ठान में लगें रहने वाले।बहुत बड़ी आंख वाले, परमात्मा का प्रत्यक्ष दर्शन करने वाले, बहुत बड़े योगी, योग के सभी अंगों से युक्त रहने वाले,
अविरल भक्त के स्वरूप विशुद्ध, समस्त देवो के शक्ति से भी बढ़कर , तीनों पापों का हरण करने वाले, पर्मात्मास्वरूप, अत्यंत गुप्त, विशालतम, महान वेदज्ञ, दया करनेवाले, निरंतर स्थिर रहने वाले, संत श्रेष्ट, नित्य पवित्र, पंचपाप से रहित, विशुद्ध, योग को विकशित करने वाले, शिष्यों के अंदर सद्गुणों का सृजन करने वाले, प्रसन्नता से भरे हुए, नाम में संयुक्त, मनुष्यों में श्रेष्ट काम विकार को छुड़ानेवाले, भक्तों को परितृप्त करा देनेवाले, प्रभु नाम को हृदय में धारण करने वाले तुझे कोटि कोटि नमन ।










संत गुरु नानक देव जी भजन

1.महल महि बैठे अगम अपार।
भीतरी अंम्रितु सोई जनु पावै, जिसु गुर का सबदु रतनु आचार।
दुख सुख दोउ सम करि जाणै, बुरा भला संसार।
सुधि बुधि सुरति नामि हरि पाइओ, सत्संगति गुरु पीआर।
अहिनिसि लाहा हरि नामु परापति, गुरु दाता देवनहारू।
गुर मुखि सिख सोई जनु पाए, जिसनों नदरि करे करतारु।
काइआ महलु मंदरु धरु हरिका, तिसु माहि राखी जोति अपार।
नानक गुर मुखि महलि बुलाईओं, हरि मेले मेलनहार।

गुरु अर्जुन देव जी भजन :
अब मोरे ठाकुर सिउ मनु माना।
साध कृपा दइआल भये हैं, इहु छेदीओ दुसटू बिगाना।
तुम्ही सुंदर तुम्ही सियाने, तुम्हीं सुघर सुजाना।
सगल जोग अरु गिआन धियान एक, निमख ना कीमती जाना।
तुम्हीं नायक तुम्हीं छत्रपति, तुम पूरी रहे भगवाना।
पावउ दानु संत सेवा हरि, नानद सद कुरबाना।



सदगुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज भजन

1. अंतर के अंतिम तह में गुरु हैं, मन पता पाता नहीं।
नैनों के तिल में ज्योति उनकी, नज़र में आता नहीं।।
अंग संग हर वक़्त रहता, प्रगट हो आता नहीं।
हो रहे हैरान सागिल, जल्द दिखलाता नहीं।
खोजते फिरते बहुत से इस जगत में जा ब जा ।
अंतर के अंतिम तह के रह बिन कोई उसे पाता नहीं।
बिन दया सांतन्ह की मेंहीं, जानना इस राह को।
हुआ नही होता नही वो होनहार हैं नहीं।

2. खोज करो अंतर उजियारी, दृष्टिवान कोई देखा हैं
  गुरु भेदी का चरण भेद कर भक्त भेद पा लेता हैं।
निशिदिन सूरत आधार पर कर कर अंधकार फट जाता हैं।
पीली नीली लाल सफेदी, स्याही सन्मुख आता हैं ।
छट छट छट छट बिजली छटके, भोर का तारा दिखता हैं।
चंदा उगत उदय हो रविहु, धुर शब्द मिल जाता हैं ।
गुरु सदगुरु के चरण अधिनन , अगम भेद यह पाता हैं।
विविध भांति के कर्म जगत में, जीवन घेरी फ़साता हैं।
बाबा देवी कहैं कह मेंहीं सदगुरु गुरु ही बचाता हैं।।

3. गुरु हरि चरण में प्रीति हो, युग काल क्या करें।
कछुवी की दृष्टि दृष्टि हो, जंजाल क्या करें।
जग नाश का विश्वाश हो, फिर आश क्या करें।
दृढ़ भजन धन ही खास हो, फिर त्रास क्या करें।
सत्संग गढ़ में वास हो, भव पाश क्या करें।
सत बरत में दृढ़ आप हो, कोई शाप क्या करें।
पूरे गुरु का संग हो, अनंग क्या करे।
मेंहीं जो अनुभव ज्ञान हो, अनुमान क्या करें।

संत तुलसी साहेब, संत बाबा देवी साहेब भजन

💐💐💐💐💐💐💐
1 . रे हंसा प्राण पवन एक संगा।
     पांच तत्त तन साज बनो हैं , पिरथी जल पवन उतंगा।
     अगिनि आकाश मास भयो भीतर, रची कीन्हा असअंगा।।
     जब लग पवन बहे काया में, तब लग चेतन चंगा।
     निकसी पवन भवन भयो सूना, उड़त भवर तन भंगा।
     तन करि नास भास चलि जैहै, जब कोई साथ ना संगा।
     जम के दूत पूत ले जावै, नहिं कोई आस असंगा।
     यह माया त्रिभुवन पटरानी, भक्छत जीव पतंगा।
      तुलसी पवर पार को रोके, मन मत मौज तरंगा।।

💐💐💐💐💐💐💐
2. हमारा मालिक सबके माहिं।
  सब में हैं और सब तें न्यारा ऐसा अदभुत साई।
  जो गुरु मिले तो भेद बतावे, बिन गुरु दरस ना पाई।
  सब तें बड़ा छोट सबहि तें, घट घट रहा समाई।
जा घट में  परघट होय दरसे, ताके बलि बलि जाहिं।
रूप रंग आकार न वाके , वेद नेति करि गाई ।
देवी कस कस वाहि बखाने, कहन सुनन में नाहिं।




संत दरिया साहेब भजन (मारवाड़ी)

मारवाड़ वाले तथा इनके अनुयायी इन्हें संत दादू दयाल का अवतार मानते हैं इनके समय में एक और संत हुए जिन्हें दरिया साहेब बिहार वाले के नाम से जाना जाता हैं:
मारबाड़ वाले दरिया साहेब की भजन काफी लोकप्रिय हैं:
1.नाम बिन भाव भरम नहिं छूटे।
साध संग और राम भजन बिन, काल निरंतर लूटै।
मल सेती जो मल को धौवे, सो मल कैसे छूटै।।
प्रेम का साबुन नाम का पानी दोय मिल तांत टूटै।
भेद अभेद भरम का भाड़ा, चौड़े पड़ पड़ फूटै।
गुरमुख शब्द गहै उर अंतर, सकल भरम से छूटै।।
राम का ध्यान तू धर रे प्राणी अमृत का मेंह बुटै।
जन दरियाव अरप दे आपा, जरा मरण तब टूटै।।

2. मैं तोहि कैसे बिसरू देवा।
ब्रह्मा विष्णु महेश्वर ईसा , ते भी बांछे सेवा ।
शेष सहस मुख निस दिन ध्यावै, आतम ब्रह्म न पावै।।
चाँद सुर तेरी आरती गावै, हृदय भक्ति ना आवे।
अनंत जीव जाकी करत ना भावना, भरमत बिकल अयाना।
गुरु परताप अखंड लौ लागी, सो तेहिं माहिं समाना।
जन दरिया यह अकथ कथा हैं, अकथ कहा क्या जाई।।
पंछी की खोज मीन का मारग, घट घट रहा समाई।

3. साधो अलख निरंजन सोई।
गुरु परताप राम रस निर्मल और न दूजा कोई ।।
सकल ज्ञान पर ज्ञान दयानिधि, सकल जोत पर जोती।
जाके ध्यान सहज अघ नासै, सहज मिटै जम छोती।।
जा की कथा के सरवन ते ही, सरवन जगत होई।
ब्रह्मा विष्णु महेश अरु दुर्गा, पार ना पावे कोई।
सुमिर सुमिर जन होइ हैं राना , अति झीना से झीना।
अजर अमर आच्छय अविनाशी, महाबीन परबीना।।
अनंत संत जाके आस पियासा, अगन मगन चिर जीवै।
जन दरिया दासन के दासा, महा कृपा रस पीवैं।।


गोस्वामी श्री लक्ष्मीनाथ जी भजन


गोस्वामी श्री लक्ष्मीनाथ जी की महिमा निराली हैं, उनके भक्तों की कमी नहीं, शिवा भक्त श्री लक्ष्मीनाथ, राम भक्त श्री लक्ष्मीनाथ बाबा जो पूरे विश्व में बाबाजी के नाम से विख्यात हैं.
💐💐💐💐💐💐💐
"हे जटाधर डमरू बजा के लक्ष्मीपति छि दास अहिं के।
हे रामेश्वर हरे राम भज के लक्ष्मीपति छि दास अहिं के।।"
                        : आकाश चंद्र मिश्रा"7022075788"👍


1. प्रथम देव गुरु देव जगत में।

प्रथम देव गुरु देव जगत में , और ना दूजो देवा ।
गुरु पूजे सब देवन पूजे , गुरु सेवा सब सेवा।
गुरु इष्ट गुरु मंत्र देवता, गुरु सकल उपचार।
गुरु मंत्र गुरु तंत्र हैं, गुरु सकल संसारा।
गुरु आवाहन ध्यान गुरु हैं, गुरु पंच विधि पूजा।
गुरु पद हव्य कव्य गुरु पावक ,सकल वेद गुरु दूजा।
गुरु होता गुरु याग महापशु, गुरु भागवत ईशा।
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु सदाशिव , इंद्र वरुण दिगधीशा।
बिन गुरु जप तप दान व्यर्थ व्रत ,तीरथ फल नहीं दाता।
लक्ष्मीपति नहिं सिद्ध गुरु बिनु वृथा जीव जग जाता।

2. हैं तो स्वामी सबके भीतर ।

हैं तो स्वामी सबके भीतर लेकिन पता न होता हैं ।
जैसे रंग रहे मेंहदी में वैसा मालूम होता हैं ।।
जैसे मकड़ा जाल जगत में तरह तरह के छाता हैं ।
धरि के देखो उसके भीतर तनिक सुत नहीं मिलता हैं ।।
इंद्रजाल का अजब तमाशा पुतली ताल लगाता हैं ।
हैं कोई भीतर दूसरा बैठा , नाना नाच नाचता हैं ।।
जैसे बुद बुद जल में होता जल माहिं समाता हैं ।
लक्ष्मीपति झूठी यह माया ,ब्रह्म सत्य मन भाता हैं।।

3. प्रात समय उठि सहस कमल पर।
प्रात समय उठी सहस कमल पर ध्यान धरो करो
कर गयी वारी पखारि चारु तन , मानस पूजा सारो।।
भद्र स्वस्ति सिंहासन सारंग, कच्छप मोर सुधारो।
सिद्धासन करि हृदय चिबुक धरि, भृकुटि नैन निहारो।।
बद्ध कमल पर दृष्टि नासिका, रसना तालु लगाओ।
कर संपुट करि शक्ति ध्यान धरि , बहु विधि व्यधि नशाओ।
प्राणायाम विधान करो कुछ , चंद्र सूर्य हित लाओ।
नाड़ी सोधि त्रिकोण यंत्र पर, शंकर शीश नवाओ।
द्वादश पूरक षोड़श कुम्भक, दश रेचक मन लाओ।।
ब्रह्म बीज लै भूति शुद्ध करि, पातक मूल नसाओ।
एक स्वाह गहि तार शब्द करि, गगनहिं पवन चढ़ाओ।
लक्ष्मीपति निहारी परम पद, जीव मुक्त हो जाओ।।